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प्रेग्नेंसी और स्ट्रेस

By Rashmi, जनवरी 8, 2017 Posted in: खुद की देखभाल

खुशखबरी! आप माँ बनने वाली हैं…. !!

पर सभी एक्सपेक्सटिंग माँओं के लिए कभी-कभी ये खुशी की बात इतनी भी खुश करने वाली नहीं होती है……..!!

कुछ एक दो जेनरेशन पहले की बात करूं तो माँ बनना इतना परेशानी भरा नहीं था तकलीफें तो थी पर लोग आसानी से उसे सम्हाल लेते थे। कंसीव करना आसान था, संयुक्त परिवार में होने पर बच्चे के जन्म से पहले का माँ और बच्चे का खयाल सब की जिम्मेदारी होती थी।  बच्चे के जन्म के बाद परवरिश की परेशानी भी नहीं थी। पर अब घर की महिलायें, सिर्फ घर ही नहीं बाहर भी बराबर से व्यस्त हैं। बच्चों के पालन पोषण का तरीका बहुत बदल गया है। परिवार अब ज्यादातर न्यूक्लियर है तो बच्चों को पालने की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ माता पिता पर ही होती है। जिसका असर अब घरेलू झगड़े, डिवोर्स, वाद विवाद और तनाव है, जो आज कल के परिवारों मे देखा जा सकता है।   

कुछ लाइफस्टाइल बदलाव से बहुत महिलाओं में उनके टीन एज से ही हॉर्मोनल समस्याएं होने लगी हैं। PCOD, थाइरॉइड ग्लैन्ड से जुड़ी समस्याएं बहुत ही आम हो गई हैं। ये सारी समस्याएं पहले तो गर्भ धारण में ही व्यवधान डालती हैं। उसके बाद भी पूरे नौ महीने कोई ना कोई समस्या बनी ही रहती है। आजकल तो एक और बात बहुत देखने में आती है, कि जेस्टेशन पीरीअड में, अधिकांशतः कोई ना कोई बीमारी जैसे डाइबिटीस, ब्लड प्रेशर, हाइपो थाइरॉइडिसम जैसी कई समस्याएं तीसरे ट्रिमिस्टर में लग ही जाती है। यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है कि अगर कोई समस्या आम है तो इसका ये मतलब कतई नहीं है की उसका प्रभाव कम हो गया है। बल्कि अब ज्यादा जनसंख्या उससे ग्रसित है और सच में ऐसे बदलाव की आवश्यकता है जिससे इसे काबू किया जा सके।

कुल मिलकर अगर कहूँ तो माँ बनना अब उतना आसान नहीं है। तो जब भी आप माँ बनने वाली हों तो कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखें –

  1. रेस्ट के लिए समय निकालें: हम अपनी दैनिक रूटीन में “टेक केयर” और “टेक रेस्ट” जैसे शब्दों का इस्तेमाल अपनों को रिलेक्स करने के लिए करते हैं। पर प्रेग्नेंसी में इन शब्दों का मायने माँ और बच्चे दोनों के लिए  बहुत अधिक बढ़ जाता है।
  2. अपने भय को अपने भीतर ना रखें: आप जो भी सोच कर डर रही हैं उसे अपने किसी नजदीकी व्यक्ति से जरूर शेयर करें चाहे वो आपके पति हों या कोई दोस्त।  ये बहुत ज्यादा जरूरी है उन लड़कियों के लिए जिनका यह पहला अनुभव है। ऐसा कहते है कि कई बार भय, वास्तविकता से बहुत अधिक बड़ा हो जाता है। हो सकता है जो आप सोच रही हो वैसी परिस्थिति ही ना बने पर उसके बारे में सोचकर आप अभी अपना और अपने अंदर के जीवन का बहुत ज्यादा और अनावश्यक नुकसान कर सकती हैं। शेयर करने से आपको इन शंकाओं को दूर करने का तरीका मिलेगा।
  3. खुद को खुश रखें: इस पूरे समय में अपने मन की सुने। उन लोगों से मिले जिनसे मिलन आपको वाकई खुश करत हो। यह लिस्ट आपसे बेहतर कोई नहीं बना सकता है। अपने पति के साथ हॉलिडे प्लान कर लीजिए और बेहतरीन समय बिताइए। आप पार्लर जाकर अपना मनपसंद हेयर कट कर सकती है, या फिर फुट मसाज, हेड मसाज भी ले सकती है। ये पूरी तरह आपके चॉइस पर है।
  4. डेलीवरी के लिए खुद को प्रीपेयर रखें: पहले, दूसरे और तीसरे ट्रिमिस्टर में होने वाले टेस्ट और बच्चे के डेवलपमेंट से संबंधित चीजों की जानकारी रखें। अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सभी जानकारी लें और डिलीवरी चाहे नॉर्मल हो या सर्जरी से, उसके लिए मानसिक रूप से तैयार रहें।
  5. स्लो डाऊन: ये सबसे सही समय है अपने सुपर वुमन का गाउन उतार फेकने का। कोई भी काम जल्दी में ना करें, ना कहना सीखें, अपनी क्षमता से बढ़कर किसी भी काम को करने की सोचें भी नहीं और अपने परिवार के सदस्यों से मदद लेने में जरा भी ना संकोच करें।
  6. अपने खाने और पीने का ध्यान रखें: खाने से संबंधित आपको अपनों से बहुत सारी सलाहें मिल जाएंगी। मात्रा और पोषण की दृष्टि से संतुलित भोजन करें घर का बना भोजन करें और सही मात्रा में पानी और अन्य पेय पदार्थ लेती रहें।
  7. एक्टिव रहें: प्रेग्नेंसी मतलब स्लो डाउन होना तो है पर रुकना नहीं है, सो धीरे धीरे ही सही पर अपने आप को एक्टिव रखें। प्राणायाम और कुछ विशेष योगासन करती रहें ताकि आपकी फ्लेक्सीबिलिटी बनी रहे।

इन बातों को अमल में लाएं, अनावश्यक तनाव से दूर रहें, सच में अपना ख्याल रखें और इस समय को खुशनुमा रख कर माँ बनने के इस अनुभव को सुखद बनाएं।   

Tags: self carestresspregnancynutritionpregnancy dietpregnancy carestress busterweight during pregnancy

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